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अगर आप कभी अस्पताल या फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट में गए होंगे हैं तो गोनियो मीटर के बारे में आपने सुना होगा या गोनियोमीटर देखा होगा। अक्सर गोनियोमीटर के बारे में लोगों को पता नहीं होता है। ऐसे में गोनियोमीटर देखकर लोगों के जेहन में यह सवाल आता है कि गोनियो मीटर क्या है। गोनियोमीटर उपयोग कहां होता है। या गोनियोमीटर क्या होता है।

तो चलिए आज आपको हम बताते हैं कि गोनियोमीटर क्या होता है, तथा गोनियोमीटर उपयोग कहां किया जाता है। गोनियोमीटर के प्रकार के बारे में भी हम बताएंगे।

गोनियोमीटर क्या है – goniometer meaning in hindi

गोनियोमीटर एक प्रकार का डिवाइस है, जिसका उपयोग जोड़ों के रेंज ऑफ मोशन (Range of Motion) को मापने के लिए किया जाता है। बोलचाल की भाषा में समझे तो रेंज ऑफ मोशन का अर्थ (Range of Motion meaning in Hindi) होता है कि किसी आदमी का हाथ, कंधे या हाँथ के ही किसी खास जॉइंट से कितनी डिग्री तक घूमता है। इसी तरह पैर में भी देखा जाता है कि पैर के किसी एक खास ज्वाइंट से आगे का हिस्सा कितने डिग्री तक घूमता है।

Goniometer

आमतौर से किसी भी व्यक्ति के शरीर का हर एक जॉइंट में कितने डिग्री तक का मोमेंट होता है, यह डॉक्टर को पता होता है। तथा यह पढ़ाया भी जाता है।

जब कोई मरीज आता है कि उसका पूरा हाथ नहीं उठ रहा या नहीं घूम रहा है। तो ऐसी कोई समस्या पैर में बताता है तो ऐसी स्थिति में ही गोनियोमीटर का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि कितने डिग्री तक का घुमाओ किसी पार्टिकुलर जॉइंट में हो रहा है। इसके बाद ही आगे का Treatment Plan किया जाता है।

गोनियोमीटर के प्रकार – Types of Goniometer in Hindi

मार्केट में कई अलग-अलग तरह के गोनियोमीटर मौजूद हैं। इसमें से कुछ प्रकार निम्नलिखित है-

  1. यूनिवर्सल गोनियोमीटर
  2. इलेक्ट्रॉनिक गोनियोमीटर
    या इलेक्ट्रो गोनियोमीटर
  3. ग्रेविटी डिपेंडेंट गोनियोमीटर।

इन सभी गोनियो मीटर में से सबसे ज्यादा तथा आम तौर से यूनिवर्सल गोनियोमीटर का उपयोग ही किया जाता है। तो चलिए आगे अब यूनिवर्सल गोनियो मीटर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

यूनिवर्सल गोनियोमीटर – Universal Goniometer in Hindi

मेडिकल फील्ड में सबसे ज्यादा उपयोग यूनिवर्सल गोनियोमीटर का ही किया जाता है। इस गोनियोमीटर को डॉक्टर मोरे (Dr. Moore) नाम के एक साइंटिस्ट ने बनाया था। यह गोनियोमीटर आमतौर से प्लास्टिक की या मेटल का बना हुआ होता है।

इसे आसानी से उपयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि वर्तमान समय में इस गोनियो मीटर का उपयोग बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा इसके माप को बिल्कुल सटीक भी माना जाता है।

यूनिवर्सल गोनियोमीटर में आमतौर से कई पार्ट होते हैं। इसके प्रमुख पार्ट में एक Body, Arm तथा Fulcrum हैं। फलकर्म को ही Axis भी कहा जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक गोनियोमीटर – Electric Goniometer in Hindi

इलेक्ट्रॉनिक गोनियोमीटर को 1959 में Kar Pavich और Karvich ने बनाया था। इलेक्ट्रो गोनियोमीटर भी काफी हद तक यूनिवर्सल गोनियोमीटर की तरह ही होता है। इस गोनियोमीटर में आमतौर से दो आर्म होते हैं। जो कि पोटेंशियोमीटर से जुड़े हुए होते हैं। इस गोनियोमीटर के दोनों आर्म प्रॉक्सिमल तथा डिस्टल पार्ट पर जुड़े होते हैं। इसके साथ एक पोटेंशियोमीटर भी जुड़ा होता है।

electronic goniometer ka Upyog आमतौर से रिसर्च में किया जाता है। यहां इसका उपयोग डायनेमिक जॉइंट रेंज ऑफ मोशन मापने के लिए किया जाता है।

ग्रैविटी डिपेंडेंट गोनियोमीटर – Gravity Dependent Goniometer in Hindi

इस तरह का गोनियोमीटर गुरुत्वाकर्षण के नियम पर आधारित होता है। इस तरह के गोनियोमीटर में आमतौर से एक इंकलाइनों मीटर लगा होता है। इसी की मदद से जॉइंट ऑफ जॉइंट रेंज ऑफ मोशन को मापा जाता है।

ग्रैविटी डिपेंडेंट गोनियोमीटर भी दो प्रकार का होता है –

पेंडुलम गोनियोमीटर
फ्लूड गोनियोमीटर

तीनों प्रकार के गोनियो मीटर के बारे में जाने के बाद चलिए अब बात करते हैं कि कहां गोनियोमीटर का उपयोग कहां करना चाहिए। और किन स्थितियों में गोनियो मीटर का उपयोग करने से बचना चाहिए।

गोनियोमीटर का उपयोग निम्नलिखित केस में नहीं करना है – Goniometer Contraindication in Hindi

  • अगर किसी का जॉइंट डिसलोकेट कर गया है तो उसमें गोनियोमीटर का उपयोग नहीं करना है।
  • अगर किसी मरीज़ को किसी तरह का फ्रैक्चर है तो भी Goniometer Use नहीं किया जाएगा।
  • ऐसा मरीज जिसका हाल ही में सर्जरी किया गया है तो गोनियोमीटर उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • एक्यूट इन्फ्लेमेशन की स्थिति में गोनियोमीटर का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • ओस्टियोपोरोसिस की केस में भी Goniometer Use होगा
  • अगर किसी मरीज को हीमोफीलिया तथा हेमेटोमा की शिकायत है तो उसमें भी इसका गोनियोमीटर का उपयोग नहीं होगा।

गोनियोमीटर का उपयोग कैसे करें – How to Use Goniometer in Hindi

रेंज ऑफ मोशन मापने के लिए सबसे पहले सही गोनियो मीटर का चुनाव करें। इसके बाद सबसे पहले मरीज को ऐसे पोजीशन में रखे हैं कि मरीज को कोई दिक्कत ना हो। ये तय कर लें कि मरीज़ कंफर्टेबल पोजिशन में है। क्यों कि माप के दौरान अगर मरीज हिलता डोलता है तो माप सटीक नहीं आ पाता है।

जिस जॉइंट का range of motion मापना है वहां गोनियोमीटर रखने से पहले उस हिस्से को ध्यान से देख लेगी किसी तरीके का घाव या कोई दूसरी समस्या वहां नहीं है। साथ ही वहां पर कोई कपड़ा भी नहीं होना चाहिए।

इसके बाद Goniometer Measurement ले रहे व्यक्ति को भी चाहिए कि वह आराम से बैठ जाए या अपने कंफर्टेबल पोजीशन में आ जाए। ताकि माप लेने के दौरान दिक्कत ना हो। इसके बाद एक प्रॉमिनेंट पॉइंट को देखते हुए उस पर स्टैटिक आर्म को रख दें। उसके बाद उसके मोबाइल आर्म को जॉइंट के साथ घुमाएं। जहां तक जॉइंट आराम से जाता है, यही उसका जॉइंट रेंज ऑफ मोशन है। ध्यान दें की माप लेने के दौरान जॉइंट को अपनी ताकत से आगे पीछे ना घुमाएं। ऐसा करने पर Bone Fracture हो सकता है।

गोनियोमीटर का दाम – goniometer price in Hindi

गोनियोमीटर की कीमत बहुत ज्यादा नहीं होती है। आमतौर से यह बाजार में 300 रुपए से मिलना शुरू हो जाता है। गुणवत्ता के आधार पर गोनियोमीटर की कीमत अलग अलग हो सकती है। हालांकि आराम से 500 से 600 रुपए में अच्छी गुणवत्ता का गोनियोमीटर मिल जाता है। चूंकि गोनियोमीटर अलग-अलग साइज के भी होते हैं। ऐसे में एक साथ कई गोनियोमीटर लेने पर कीमत कुछ ज्यादा पड़ सकती है।

इस लेख में हमने जानकारी देने की कोशिश की है कि गोनियोमीटर क्या है (Goniometer kya hai), या गोनियोमीटर क्या होता है (Goniometer kya hota hai)। इसके अलावा गोनियोमीटर उपयोग ( Goniometer ka Use) कहां किया जाता है। उम्मीद है की आप समझ गए होंगे कि गोनियोमीटर का उपयोग क्या है।

अगर इस लेख के बारे में कोई राय देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं। साथ ही कुछ पूछना हो तो आप वह भी कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। अगर यह लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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