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स्ट्रेस यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस का इलाज : स्लिंग प्रॉसेस – bladder sling procedure in hindi

● स्ट्रेस यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस – stress urinary incontinence in hindi

यूरीनरी इंकॉन्टिसेंस की बीमारी में मूत्र रोकने की क्षमता खत्म हो जाती है। इसके कई प्रकार होते हैं। उन्हीं में से एक प्रकार स्ट्रेस यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस भी है। इस स्तिथि में केवल हंसने, ज़ोर से बोलने, पेट पर हल्का दबाव पड़ने, बैठने, करवट बदलने मात्र से ही पेशाब रिसने लगता है।

यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के बारे में विस्तार से जानने के यहां क्लिक करें।

इस आर्टिकल में आपको स्ट्रेस यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के एक इलाज के बारे में बता रहे हैं।

Sling Procedure in Hindi – परिचय

स्लिंग की प्रक्रिया स्ट्रेस यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस के इलाज (Stress Urinary Incontinence Treatment) का एक तरीका है। इस प्रक्रिया के तहत पेल्विक फ्लोर के मांसपेशियों तथा मूत्राशय मार्ग के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए मूत्राशय मार्ग के नीचे एक स्लिंग लगाया जाता है।

● स्लिंग की प्रक्रिया क्यों की जाती है? – stress urinary incontinence treatment sling

स्लिंग प्रक्रिया महिलाओं में की जाती है। यह स्ट्रेस यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस या प्रेग्नेंसी, बच्चे के जन्म, किसी दुर्घटना, रेडिएशन या मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों के कमज़ोर हो जाने के कारण खांसने, छींकने, हंसने या हॉर्मोन में होने वाले बदलाव इत्यादि के कारण अचानक महिलाओं में मूत्र रिसने की समस्या आने लगती है तो स्लिंग की प्रक्रिया को किया जाता है।

जब पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों में कमज़ोरी आ जाती है, तो सहारे (सपोर्ट) की कमी के कारण मूत्राशय पर अचानक दबाव पड़ने की स्तिथि में मूत्राशय मार्ग (ब्लैडर पाइप) बंद नही रह पाता है। कस कारण मूत्र अचानक ही बाहर आ जाता है। कीगल एक्सरसाइज आपके पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, वहीं स्लिंग की प्रक्रिया मूत्राशय मार्ग के खो चुके सहारे को फिर से स्थापित करता है। स्ट्रेस यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की स्तिथि में स्लिंग की प्रक्रिया ही इलाज का सबसे बेहतर विकल्प है।

● स्लिंग की प्रक्रिया के अलावा अन्य विकल्प

• सुरक्षा पैड
• पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों की मज़बूती के लिए कीगल एक्सरसाइज

• चर्च कॉल्पोससपेंशन
• कुछ मामलों में यूरेथ्रा के पास इंजेक्शन दे कर इलाज

● स्लिंग की प्रक्रिया से पहले की तैयारी

स्लिंग की प्रक्रिया से पहले डॉक्टर आपको कुछ सुझाव दे सकते हैं। ये सुझाव निम्नलिखित हो सकते हैं :

• अगर आप खून को पतला करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो स्लिंग की प्रक्रिया से हफ्ते भर पहले इसका सेवन बंद कर दें।

• प्रक्रिया से पहले आपको 6 से 12 घण्टे तक बिना कुछ खाए पीने रहना होता है।

• प्रक्रिया से पहले आपको सामान्य रूप से किए जाने वाले जांच तथा मूत्र जांच करवाना पड़ सकता है।

● प्रक्रिया के दौरान क्या होता है? stress urinary incontinence treatment sling Procedurr

इस प्रक्रिया में कम से कम चीरा लगाने की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया के तहत स्लिंग लगाने में सामन्यतः 20 मिनट से भी कम का समय लगता है। इसे लगाने के लिए डॉक्टर लोकल या जेनरल एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता है। यह डॉक्टर पर निर्भर करता है, की वह किस प्रकार के एनेस्थीसिया का चुनाव करते हैं।

इस प्रक्रिया के तहत सबसे पहले बच्चे को जन्म देने वाली नली के सामने वाली दीवार पर एक एल छोटा सा चीरा (कट) लगाया जाता है। इसके बाद मूत्राशय मार्ग को सहारा देने के लिए शरीर के अंदर ऑपरेशन के माध्यम से जाली की एक पतली पट्टी लगाई जाती है। यह जाली की पतली पट्टी यूरेथ्रा के चारो ओर एक मांसपेशी की तरह काम करने लगता है।

● स्लिंग की प्रक्रिया के बाद क्या होता है?

इस प्रक्रिया के बाद मूत्राशय से मूत्र को बाहर निकालने के लिए डॉक्टर मूत्र मार्ग में एक कैथेटर लगा सकता है। सामान्यतः ये कैथेटर अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही निकाल दिया जाता है।

अगर मूत्राशय ठीक ढंग से पूरी तरह खाली नही हो पा रहा है तो इस समस्या के ठीक होने तक मरीज़ को घर पर भी कैथेटर लगाए ही रखना पर सकता है। अधिक्तर महिलाओं में प्रक्रिया के अगले ही दिन या अगले दो दिन में कैथेटर निकाल दिया जाता है।

स्लिंग के प्रक्रिया के बाद 4 से 6 हफ्ते तक मरीज़ को शारीरिक संबन्ध बनाने, भारी सामना उठाने तथा व्यायाम करने से बचना चाहिए। इसके अलावा आप डॉक्टर द्वारा दिए सुझाव के आधार पर एक से दो हफ्ते के भीतर ही अपने सामान्य रूप से किए जाने वाले काम कर सकते हैं।

● स्लिंग की प्रक्रिया के फायदे

आंकड़ो के अनुसार इस प्रक्रिया के बाद 93 से 94 प्रतिशत तक मरीज़ को समस्या से आराम मिल जाता है।

समय के साथ जाली की उस पतली पट्टी पर भी ऊतक बढ़ते हुए आ जाते हैं, तथा यह उसे और भी मज़बूती प्रदान करता है। जिस तरह से हृदय की बीमारी में शंट के उपयोग के बाद वह शरीर का हिस्सा बन जाता है, ठीक वैसे ही स्लिंग भी शरीर का ही हिस्सा बन जाता है।

● स्लिंग की प्रक्रिया से जुड़े ख़तरे

स्लिंग के लिए की जाने वाले ऑपरेशन में निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं :

• रक्तस्राव
• संक्रमण
• मूत्राशय या मूत्र मार्ग को नुकसान हो सकता है।

● स्लिंग की प्रक्रिया के ख़तरे

स्लिंग की प्रक्रिया में निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं :

• मूत्रमार्ग में संक्रमण
• अर्ज इंकॉन्टिनेंस (यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस का प्रकार)
• शरीर के सामान्य ऊतकों से लगाए गए स्लिंग को नुकसान पहुंच सकता है।

• सूजन तथा जलन हो सकता हैम

• स्लिंग की प्रक्रिया के द्वारा अर्जेंसी और अर्ज यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या समाप्त नही होती है।

● डॉक्टर से कब संपर्क करें?

प्रक्रिया के बाद निम्नलिखित लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें :

• स्लिंग की प्रक्रिया के बाद मूत्र त्याग करने में समस्या बढ़ने पर

• मूत्र में संक्रमण के लक्षण दिखने पर
• बुखार आने ओर
• योनि में काफी तेज़ दर्द होने पर
• असामान्य गंध के साथ वजाइनल डिस्चार्ज
• योनि से काफी अधिक खून बहना

इस लेख में हमने आपको Stress Urine Incontinenece Treatment in Hindi की पूरी जानकारी देने की कोशिश की है। अगर आप कुछ और जानकारी चाहते हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

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