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bell’s palsy in hindi – बेल्स पाल्सी क्या है, बेल्स पाल्सी के कारण, बेल्स पाल्सी का इलाज – बेल्स पाल्सी इन हिंदी

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि बेल्स पाल्सी क्या है, तो इस आर्टिकल को आखिर तक पढ़ें। इस आर्टिकल में हम बेल्स पाल्सी के बारे में हिंदी में (bell palsy in hindi language) में बताएंगे। हम आपको बताएंगे कि बेल्स पाल्सी क्या है (Bells Palsy kya hai). बेल्स के कारण के कारण क्या हैं (bell’s palsy causes in hindi). बेल्स पाल्सी के लक्षण क्या हैं (bell palsy symptoms in hindi). इसके अलावा हम आपको बेल्स पाल्सी का इलाज (bell’s palsy treatment hindi) के बारे में भी बताएंगे। Bell’s Palsy ka ilaj के तहत हम आपको बेल्स पाल्सी एक्सरसाइज (bell’s palsy exercises in hindi) के बारे में भी बताएंगे।

तो चलिए, सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को बारी-बारी से देखते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि bells palsy kya hai.

बेल्स पाल्सी क्या है – What is Bells Palsy in Hindi

Bells Palsy Hindi mein – बेल्स पाल्सी एक ऐसी बीमारी है जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे के मांसपेशियों में अचानक काफी अधिक कमज़ोरी हो जाती है। इसे आसान भाषा में समझें तो Facial Muscles के अचानक कमज़ोर हो जाने को ही बेल्स पाल्सी की स्थिति कहा जाता है। ये कमज़ोरी आमतौर से चेहरे के एक तरफ की मांशपेशियों में ही देखने को मिलता है। जिस तरफ की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं, उस तरफ व्यक्ति का कंट्रोल नही रहता है।

कुछ बेल्स पाल्सी कुछ लोगों में कुछ ही दिन में ठीक हो जाता है। जबकि कुछ लोगों में ये कुछ अधिक दिनों तक रह जाता है। ऐसे में फिजियोथेरेपी के द्वारा बेल्स पाल्सी का इलाज किया जाता है। Bell’s palsy को Acute peripheral facial palsy भी कहा जाता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति में देखने को मिल सकता है।

बेल्स पाल्सी का अर्थ – Bell’s palsy hindi meaning

बेल्स पाल्सी का हिंदी (Bells Palsy ka Hindi) बात करें तो बेल्स पाल्सी की स्थिति को हिंदी में बैल अंगघात या बेल की पक्षाघात कहा जाता है। लेकिन आम बोलचाल की भाषा में बेल्स पाल्सी को चेहरे का लकवा (Chehre ka Lakwa) ही कहा जाता है। चेहरे का लकवा के अलावा इसे चेहरे का पैरालाइसिस भी कहते हैं। लेकिन काफी हद तक ये केवल बेल्स पाल्सी या चेहरे का लकवा (chehre ka lakwa) नाम से ही जाना जाता है।

बेल्स पाल्सी का लक्षण – Bell palsy symptoms in hindi

Bell’s Palsy in Hindi

बेल्स पाल्सी के लक्षण (Bells Palsy ke lakshan) या चेहरे के लकवा का लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं –

बेल्स पाल्सी होने से पहले आमतौर से कुछ ज़्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलते हैं। लेकिन फेशियल पैरालाइसिस होने से 1 – 2 घण्टे पहले चेहरे में तेज़ी से बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। बेल्स पाल्सी का लक्षण सबसे पहले ये दिखता है कि –

  • एक चेहरे पर एक तरह भारी – भारी महसूस होने लगता है।
  • एक तरफ की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
  • उस तरफ की आंख बंद करने या मुस्कुराने की क्षमता खत्म हो जाती है।
  • मुंह से लार टपकने लगता है।
  • जिस तरफ चेहरे का लकवा हुआ है, उस ओर कान के पीछे दर्द हो सकता है।
  • जबड़े के आसपास दर्द हो सकता है।
  • जिस ओर चेहरा का लकवा यानी बेल्स पाल्सी हुआ है, उस ओर के कान से सुनाई कम देने लग सकता है।
  • सर दर्द
  • स्वाद पहचानने की क्षमता खत्म या कम हो जाती है।

चेहरे का लकवा का लक्षण ( chehre ke lakwa ka lakshan) यानी Bell palsy symptoms in hindi आमतौर से यही सब देखने को मिलता है।

आमतौर से चेहरे का लकवा यानी बेल्स पाल्सी चेहरे के किसी एक ओर ही होता है। लेकिन कुछ व्यक्तियों में पूरे चेहरे का लकवा हो सकता है। तब बेल्स पाल्सी के लक्षण चेहरे के दोनों ओर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि ऐसा बेहद कम ही देखने को मिलता है।

बेल्स पाल्सी का कारण – bell’s palsy causes in hindi

बेल्स पाल्सी होने के कारण (Bells Palsy ke karan) या चेहरा के लकवा का कारण (bell’s palsy reason in hindi) की बात करें तो बेल्स पाल्सी होने का वास्तविक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। बेल्स पाल्सी का कारण अब तक नहीं पता है, लेकिन माना जाता है कि चेहरे की मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाले Nerve में स्वेलिंग और इन्फ्लेमेशन होने की वजह से ही बेल्स पाल्सी होता है। इसके अलावा बेल्स पाल्सी होने का कारण Viral Infection को भी माना जाता है।

निम्नलिखित वायरस को बेल्स पाल्सी का कारण कुछ हद तक माना जाता है – Viruses that cause Bell’s palsy in Hindi

  • Cold sores या genital herpes (हर्पीस सिम्प्लेक्स)
  • Chickenpox तथा shingles (herpes zoster)
  • Epstein-Barr
  • एडिनोवायरस
  • रूबेला वायरस
  • इन्फ्लुएंजा B
  • Coxsackievirus)
  • Mumps virus

आमतौर से इसे ही बेल्स पाल्सी का कारण माना जाता है।

बेल्स पाल्सी रिस्क फैक्टर – Bells Palsy Risk Factor in Hindi

बेल्स पाल्सी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इसके अलावा यह महिला तथा पुरुष में से किसी को भी हो सकता है। आमतौर से महिलाओं में गर्भावस्था में यह ज्यादा देखने को मिलता है। खासकर थर्ड थर्ड ट्राइमेस्टर में ज्यादा यह देखा जाता है। कुछ महिलाओं में देखा जाता है कि बच्चे को जन्म देने के बाद के पहले हफ्ते में महिला को यह हो सकता है। इसके अलावा अप्पर रेस्पिरेट्री इनफेक्शन से जूझ रहे व्यक्ति में भी यह होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा जिन्हें डायबिटीज है, उनमें भी बेल्स पाल्सी हो सकता है।

बेल्स पाल्सी की जांच – Bells Palsy tests in Hindi

आमतौर से बेल्स पाल्सी के लिए किसी तरह की जांच की आवश्यकता नहीं होती है। डॉक्टर मरीज की स्थिति तथा चेहरे की पड़ताल करने के बाद यह कंफर्म कर लेते हैं कि यह बेल पाल्सी ही है। कुछ परिस्थितियों में बेल्स पाल्सी जैसे लक्षण दूसरे कारणों से भी हो सकते हैं जैसे ही स्ट्रोक होने पर भी बेल्स पाल्सी से मिलते जुलते लक्षण देखने को मिल सकता है। ऐसे में उसे कंफर्म करने के लिए डॉक्टर एक्सरे या m.r.i. करवा सकते हैं। आमतौर से ऐसा होता नहीं है।

बेल्स पाल्सी का इलाज – Bell’s palsy treatment hindi

बेल्स पाल्सी का इलाज संभव है। अगर लगातार नियमित रूप से इलाज कराया जाता है तो बेल्स पाल्सी पूरी तरीके से ठीक हो जाता है। कुछ मरीजों में बेल्स पाल्सी गंभीरता कम होने पर बेल्ल स पाल्सी ट्रीटमेंट चलने के बाद लगभग 1 से 2 हफ्ते में ठीक हो जाता है। जबकि गंभीरता अधिक होने पर 6 महीने तक का समय लग सकता है। बेल्स पाल्सी का इलाज (Bells palsy ka ilaj) के लिए दवाई दी जाती है। इसके अलावा बहुत ज्यादा समस्या होने पर सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। लेकिन आमतौर से इसकी नौबत नहीं आती क्योंकि बेल्स पाल्सी का इलाज फिजियोथेरेपी में मौजूद है। बेल्स पाल्सी के लिए फिजियोथेरेपी को फर्स्ट चॉइस ऑफ ट्रीटमेंट माना जाता है। bells palsy physiotherapy treatment से लगभग बेल्स पाल्सी से आराम मिल जाता है। चलिए यहां हम आपको बेल्स पाल्सी एक्सरसाइज (bell’s palsy exercises in hindi) विस्तार से बताते हैं।

बेल्स पाल्सी एक्सरसाइज – bell’s palsy exercises in hindi

बेल्स पाल्सी का इलाज या बेल्स पाल्सी ट्रीटमेंट सबसे अच्छा फिजियोथेरेपी को माना जाता है। अगर बीमारी कम गंभीर है तो 2 हफ्ते की Physiotherapy Treatment Bells Palsy को ठीक कर देता है। अगर समस्या अधिक है तो
बेल का पक्षाघात के लिए भौतिक चिकित्सा (bells palsy physiotherapy treatment) कुछ अधिक समय तक चल सकता है। आमतौर से 6 महीने तक Physiotherapy करवाने के बाद बेल्स पाल्सी रिकवर (Bell’s palsy recovery in hindi) हो जाता है।

जैसे ही कोई व्यक्ति बेल्स पाल्सी का शिकार होता है उसके चेहरे की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है अगर ऐसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो समय के साथ मांसपेशियां कड़ा होने लगता है। साथ ही चेहरे का रूप भी बदल जाता है। इसे ही रोकने के लिए अलग- अलग एक्सरसाइज दिया जाता है।

बेल्स पाल्सी एक्सरसाइज के तहत (फेसिअल पैरालिसिस ट्रीटमेंट इन हिंदी) के तहत सबसे पहले चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है। इसके लिए अलग-अलग बेल्स पाल्सी एक्सरसाइज हैं, जिसे करने के बाद मरीज़ को आराम मिलता है। Electrotherapy का भी उपयोग बेल्स पाल्सी के केस में किया जाता है। इसके तहत मसल स्टिमुलेटर (Muscle Stimulator) की मदद से Muscles को स्टिमुलेट किया जाता है।

इसके अलावा भी कई अलग-अलग तकनीक हैं जिसका उपयोग एक एक्सपर्ट फिजियोथेरेपिस्ट बेल्स पाल्सी का उपचार करने में करता है। इस लिए जैसे ही बेल्स पाल्सी या फेसिअल पैरालाइसिस की स्थिति बनें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने के बाद पक्षाघात भौतिक चिकित्सा यानी बेल्ल स पाल्सी ट्रीटमेंट शुरू कर देनी चाहिए।

ध्यान दें कि bells palsy physiotherapy treatment जितनी देर से शुरू करेंगे, बेल्स पाल्सी ठीक होने में (bell’s palsy recovery in hindi) में उतना अधिक समय लग सकता है। इस लिए बेल्स पाल्सी का उपचार (फेसिअल पैरालिसिस ट्रीटमेंट इन हिंदी) जल्दी शुरू कर देनी चाहिए।

इस लेख में हमने जानकारी देने की कोशिश की बेल्स पाल्सी क्या है (bell’s palsy hindi meaning). बेल्स पाल्सी का कारण क्या है (bell’s palsy reason in hindi)
बेल्स पाल्सी का लक्षण क्या है (bell palsy symptoms in hindi). बेल्स का इलाज क्या है या चेहरे के लकवा का इलाज क्या है। बेल्स पाल्सी का फिजियोथेरेपी इलाज क्या है या फेसिअल पैरालिसिस ट्रीटमेंट इन हिंदी (bells palsy physiotherapy treatment). अगर आप बेल्स पाल्सी के संबंध में या फिजियोथेरेपी के संबंध में कोई और सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

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