• Sat. Jun 19th, 2021

Chest Physiotherapy in Hindi : चेस्ट फिजियोथेरेपी क्या है और चेस्ट फिजियोथेरेपी कैसे किया जाता है – पूरी जानकारी

चेस्ट फिजियोथेरेपी इन हिंदी : फेफड़ो से जुड़े किसी तरह के संक्रमण से ग्रसित मरीजों में तथा इसकी वजह से सांस की समस्या से जूझ रहे मरीजों में चेस्ट फिजियोथेरेपी काफी कारगर साबित होता है। बहुत कम लोगों को मालूम है कि चेस्ट फिजियोथेरेपी क्या होता है। चेस्ट फिजियोथेरेपी कैसे किया जाता है (chest physiotherapy procedure in hindi). इसलिए इस आर्टिकल में हम आपको चेस्ट फिजियोथेरेपी हिंदी में (Chest Physiotherapy in Hindi) में बताएंगे। चेस्ट फिजियोथेरेपी इन हिंदी में बताने के अलावा हम आपको चेस्ट फिजियोथैरेपी के फायदे, नुकसान, Chest Physiotherapy indication in Hindi तथा Chest Physiotherapy Contraindication in Hindi के बारे में भी बताएंगे।

चेस्ट फिजियोथेरेपी क्या है – What is Chest Physiotherapy in Hindi

Chest Physiotherapy kya hai या Chest Physio kya hai. इसका सीधा जवाब ये है कि चेस्ट फिजियोथैरेपी फिजियोथेरेपी की एक तकनीक है जिसके द्वारा किसी कारण Lungs की समस्या होने के कारण जब कफ (Cough) या बलगम आसानी से बाहर नहीं आ पाते हैं तथा इससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। तब चेस्ट फिजियोथेरेपी (Chest Physio therapy) किया जाता है। इससे मरीज के फेफड़ों की स्थिति काफी बेहतर होती है तथा उसे सांस लेने में भी आसानी होने लगती है। फेफड़ों में समस्या कई कारणों से हो सकता है।

Chest Physiotherapy Definition की बात करें तो चेस्ट फिजियोथेरेपी की परिभाषा हम इस तरह देते हैं – Chest physiotherapy कई अलग-अलग एक्सरसाइज टेक्निक का समूह है जो कि Lung Function को बेहतर करता है। Removal of Secretion को भी बढ़ाता है। इसके फलस्वरूप मरीज़ को सांस लेने में आसानी होती है। यानी कि चेस्ट फिजियो में कई अलग-अलग तरह के एक्सरसाइज किए जाते है। इन सभी एक्सरसाइज को मिलाकर ही चेस्ट फिजियोथैरेपी नाम दिया गया है। चेस्ट फिजियोथैरेपी हमेशा एक विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट के द्वारा ही दिया जाता है।

कई कंडीशन में मरीज को चेस्ट फिजियोथेरेपी इसलिए भी दी जाती है ताकि मरीज को किसी तरह के फेफड़ों से संबंधित समस्याओं का सामना ना करना पड़े। तथा वह आसानी से सांस ले सके। खासकर वैसे मरीज जो बेडरिडेन होते हैं यानी बिस्तर पर आ जाते हैं तथा खुद से मोमेंट नहीं कर पाते हैं। उन्हें विशेष रूप से चेस्ट फिजियोथैरेपी दी जाती है। चेस्ट फिजियोथैरेपी किन किन परिस्थिति में (Physiotherapy indication in Hindi) दी जाती है इस बारे में हम आपको आगे बताएंगे।

चेस्ट फिजियोथेरेपी कैसे किया जाता है – Chest Physiotherapy Procedure In Hindi

Chest Physiotherapy Exercise में कई अलग-अलग तरह के एक्सरसाइज दिए जाते हैं। या कहें कि चेस्ट चीजों के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं। लेकिन हम आपको इस आर्टिकल में Chest Physiotherapy Exercise के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीक के बारे में बताने जा रहे हैं।चेस्ट फिजियोथेरेपी में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल Chest Percussion Technique का किया जाता है। इस तकनीक को कलैपिंग या Chest Clapping Exercise भी कहा जाताया Tapotement Technique भी कहा जाता है।

इस तकनीक में होता यह है कि मरीज के शरीर पर हाथ के सहारे धीरे-धीरे कलैपिंग किया जाता है। इसे आसान भाषा में समझे तो हाथ को हल्का मोड़ते हुए एक Cup Type का बना लिया जाता है तथा उसके बाद उससे मरीज के शरीर पर धीरे-धीरे चोट किया जाता है। इस दौरान मरीज को बिल्कुल चोट न लगे इस बात का पूरा ध्यान रखना होता है तथा दोनों हाथों से एक बार चोट नहीं किया जाता है।

चेस्ट फिजियोथैरेपी में क्लैपिंग वैसी जगह पर किया जाता है जहां से इसका असर सीधे फेफड़े पर होता है ताकि वहां से म्यूकस रिलीज हो सके तथा फेफड़ों में सांस लेने की क्षमता भी बढ़ सके। हमारे शरीर में फेफड़ा Breastbone के ठीक नीचे होता है। इसलिए चेस्ट फिजियोथैरेपी में क्लैपिंग टेक्निक का इस्तेमाल करते हुए मरीज के चेस्ट पर तथा ठीक पीछे तथा चारो ओर कलैपिंग की जाती है।

क्लैपिंग करते समय एक बात ध्यान देना होता है कि मरीज के शरीर पर दोनों हाथों से चोट एक साथ ना हो। बल्कि अगर पहले मरीज के शरीर पर दाहिने हाथ से क्लैप किया जाता है तो बाया हाथ उस समय हवा में होना चाहिए। और जब बाया हाथ मरीज के शरीर पर आए तो दाहिना हाथ हवा में होना चाहिए। चेस्ट फिजियो थेरेपी के दौरान क्लैपिंग की प्रक्रिया थोड़ी तेज होती है तभी मरीज़ को इसका पूरा फायदा मिल पाता है।

चेस्ट फिजियोथेरेपी कैसे होता है – Procedure of Chest Physiotherapy Hindi

चेस्ट फिजियोथैरेपी कैसे किया जाता है यह पर के आपको तो काफी कुछ समझ में आ गया होगा लेकिन चेस्ट फिजियोथैरेपी यहीं खत्म नहीं होता है क्योंकि इसके कई और चरण होते हैं।

क्लैपिंग के बाद अगले चरण के तहत मरीज को बिठाया जाता है या मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे बिस्तर पर ही लिटाया जाता है ताकि मरीज़ Cough को मुंह के द्वारा बाहर फेंक सके। इस प्रक्रिया को पोस्चरल ड्रेनेज कहा जाता है।

Patient Position in Chest Physiotherapy

मरीज़ की स्थिति के हिसाब से मरीज को बैठाकर भी तथा अलग-अलग स्थिति में लिटा कर भी चेस्ट फिजियोथैरेपी दिया जाता है।

चेस्ट फिजियोथेरेपी का उद्देश्य – Aim of Chest Physiotherapy

The purpose of chest physiotherapy in Hindi :

चेस्ट फिजियोथैरेपी का जो सबसे बड़ा और पहला उपदेश होता है वह यह होता है कि फेफड़ों में जमे हुए सिक्रीशन को बाहर निकाला जाए। तथा इसका दूसरा उद्देश्य मरीज के स्वास नली को क्लियर करना होता है ताकि मरीज आसानी से सांस ले सके और छोड़ सके।

चेस्ट फिजियोथैरेपी का दूसरा उद्देश्य फेफड़ों के क्षमता को बढ़ाना होता है तथा फेफड़ों को ज्यादा खराब होने से भी बचाना होता है। अगर मरीज के फेफड़ों में सेक्रेशन जम जाता है तो धीरे-धीरे यह फेफड़ों को और डैमेज करने लगता है। इससे मरीज के सांस लेने की समस्या बढ़ती चली जाती है। अतः चेस्ट फिजियोथैरेपी के द्वारा मरीज के फेफड़ों को कोलैप्स होने से भी बचाया जाता है।

फेफड़ों में समस्या होने पर मरीज को सांस लेने में भी काफी मेहनत करनी पड़ती है अतः चेस्ट फिजियोथैरेपी के द्वारा मरीज के साथ लेने को भी आसान बनाया जाता है।

चेस्ट फिजियोथैरेपी का एक और प्रमुख उद्देश्य होता है वह यह होता है कि मरीज के Ventilation-Perfusion Ratio को बेहतर किया जा सके तथा Gas Exchange को इम्प्रूव किया जा सके।

चेस्ट फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज कब दिया जाता है – Indication of Chest Physiotherapy in Hindi

अब तक आपको समझ में आ गया होगा कि एक चेस्ट फिजियोथैरेपी क्यों दिया जाता है चलिए अब आपको हम बताते हैं कि खासतौर से किन स्थिति में मरीज को चेस्ट फिजियोथैरेपी एक्सरसाइज की जाती है।

Chest exercise indication in Hindi :

चेस्ट फिजियोथेरेपी आमतौर से Asthma, Chronic obstructive pulmonary disease यानी COPD की स्थिति में,  Bronchitis, Bronchiectasis तथा Cystic fibrosis होने की स्थिति में दिया जाता है। निमोनिया होने पर भी चेस्ट फिजियोथैरेपी काफी कारगर साबित होता है। निमोनिया होने पर भी मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है तथा वह भी कफ या बलगम नहीं फेंक पाते हैं। ऐसे में समस्या बढ़ने लगती है। इस स्थिति से निकलने के लिए उन्हें जस्ट फिजियोथेरेपी दी जाती है यही वजह है कि कोरोनावायरस की वजह से जिन व्यक्तियों में निमोनिया होता है उन्हें भी अब चेस्ट फिजियोथैरेपी दिया जा रहा है (chest physiotherapy in covid).

इन कंडीशन के अलावा वैसे मरीज जो लंबे समय से बेड पर है तथा अपने आप हिलडुल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें भी समस्या से बचाने के लिए चेस्ट फिजियोथैरेपी दिया जाता है।

चेस्ट फिजियोथेरेपी कब नहीं देना है – Chest Physiotherapy Contraindication in Hindi

Chest Physiotherapy Contraindication in Hindi की बात करें तो कई स्थिति ऐसी है जब Chest Physiotherapy देने से मना कर दिया जाता है।

आमतौर से जिन मरीजों की फेफड़ों की सर्जरी हुई है या किसी मरीज को फेफड़े का कैंसर है तो उसमें चेस्ट फिजियोथैरेपी देने से मना किया जाता है। इसके अलावा वैसे मरीज जिनको Head या Neck Injury गले या गर्दन के आसपास कहीं भी कोई जख्म हो तो उन्हें भी चेस्ट फिजियोथैरेपी नहीं दी जाती है। इसके अलावा वैसे मरीज जिनमें एक्यूट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो उन्हें भी चेस्ट फिजियोथैरेपी देने से मना किया जाता है। Burn Patient को भी ये एक्सरसाइज नहीं देनी है।

वैसे मरीज जिनमें ब्लड प्रेशर अचानक से ऊपर नीचे होता है, उन्हें भी ये नहीं देनी है। Thorax के आसपास जिन मरीज़ों की हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो या इस रीजन में कोई समस्या हो तो एक्सरसाइज नहीं देना है। वैसे मरीज़ म जो किसी तरह के ह्रदय रोग से ग्रस्ति हो तो उन्हें भी ये एक्सरसाइज नहीं देना है।

कुल मिलाकर यही वह कंडीशन है जिसमें चेस्ट फिजियोथैरेपी नहीं देनी है। इसके अलावा चेस्ट फिजियोथैरेपी देने से पहले मरीज़ की अच्छे से जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए। कुछ भी असामान्य लगने पर ये एक्सरसाइज नहीं देने चाहिए।

उम्मीद है आपको समझ में आ गया होगा कि चेस्ट फिजियोथैरेपी किसे कहते हैं (Chest Physiotherapy in Hindi). चेस्ट फिजियोथैरेपी देने का तरीका क्या है (How to do chest physiotherapy). तथा चेस्ट फिजियोथैरेपी कब देना है और कब नहीं देना है (Chest Physiotherapy Indication and Contraindication in Hindi).

चेस्ट फिजियो (Chest Physio) के बारे में एक बात हमेशा ध्यान रखें कि चेस्ट फिजियोथैरेपी सिर्फ और सिर्फ एक एक एक्सपर्ट Chest Physiotherapist के द्वारा ही दिया जाना चाहिए इसे खुद से घर पर दौड़ाने या खुद से घर पर करने की कोशिश ना करें अन्यथा मरीज को फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है। इसलिए हमेशा फिजियोथैरेपिस्ट से ही चेस्ट फिजियोथैरेपी करवाएं।

अगर आप इस बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं या आप एक अच्छे Physiotherapist की तलाश में हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करते हुए व्हाट्सएप्प पर संपर्क कर सकते हैं।


व्हाट्सएप्प (WhatsApp) पर संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें


लगातार जानकारी पाते रहने के लिए हमसे आप व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं। ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें –


टेलीग्राम पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें
धन्यवाद

धन्यवाद

Share and Enjoy !

0Shares
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *