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हेपेटाइटिस बी – hepatitis B

लिवर क्या है – Liver in Hindi

लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह दाईं पसली के नीचे रहता है। इसका औसतन वजन लगभग 1.2 किलोग्राम तथा इसका आकार एक ओर से चिपके फुटबॉल की तरह होता है। लिवर हमारे शरीर का बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है जो कि कई तरह के काम करता है। जो भी हम आप खाते या पीते हैं, उसे लिवर ऊर्जा तथा पोषक तत्वों में बदलता है ताकि शरीर उसका उपयोग कर सके। इसके अलावा लिवर खून से हानिकारक तत्वों को भी हटाता है।

शुरू में लिवर के बारे में बताने का कारण यह है कि हेपेटाइटिस बी बीमारी लिवर से जुड़ी बीमारी है। चलिए, आगे हम बताएंगे कि Hepatitis b kya hai, हेपेटाइटिस बी के लक्षण, हेपेटाइटिस बी का जांच क्या है। हेपेटाइटिस होने का खतरा किसे होता है। इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण बातें हम आपको बताएंगे। तो हेपेटाइटिस बी के बारे में जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।

हेपेटाइटिस बी क्या है – Hepatitis b in Hindi

हेपेटाइटिस बी इन हिंदी – हेपेटाइटिस बी एक ऐसा वायरस है जो कि शरीर में लिवर को प्रभावित करता है। आमतौर से यह भी कह सकते हैं कि Hepatitis b liver की एक बीमारी है जो कि हेपेटाइटिस बी वायरस (Hepatitis b virus) के कारण होता है। हेपेटाइटिस बी वायरस लिवर को सामान्य रूप से काम करने में रुकावट पैदा करता है।

हेपेटाइटिस बी ठीक होता है कि नहीं – Is hepatitis B curable

हेपेटाइटिस बी से ग्रसित होने वाले मरीजों के जेहन में एक बात आता है कि हेपेटाइटिस बी ठीक होता है कि नहीं। तो आपको बता दें की हेपेटाइटिस बी के शिकार होने वाले मरीज़ों में 95 प्रतिशत मरीज 6 महीने के अंदर बिना किसी इलाज के इस बीमारी से पूरी तरह छुटकारा पा लेते हैं। 5 प्रतिशत मरीज इलाज न कराने की स्तिथि में ज़िंदगी भर इस बीमारी के शिकार बने रहते हैं। इसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी कहते हैं।

अगर बच्चे के जन्म के समय माँ हेपेटाइटिस बी से ग्रस्ति है तो ऐसे बच्चों में क्रोनिक हेपेटाइटिस वायरस (Chronic Hepatitis b Virus) होने की अधिक संभावनाएं होती है। आगे चल कर क्रोनिक हेपेटाइटिस बी, सिरोसिस, लिवर कैंसर या लिवर फेल होने का कारण भी बन सकता है।

हेपेटाइटिस बी के जोखिम कारक – Hepatitis B Risk Factors in Hindi

किसी भी तरह से हेपेटाइटिस बी वायरस के संपर्क में आने पर कोई भी व्यक्ति हेपेटाइटिस बी का शिकार हो सकता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के कारण निम्नलिखित भी हो सकता है –

• हेमोडायलिसिस के द्वारा संक्रमित होने पर
• अंग प्रत्यारोपण या सर्जरी होने पर
• संक्रमित सुईं के संपर्क से
• जन्म के समय मां के हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होने से
• हेपेटाइटिस बी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से
• अपने निजी उपयोग की वस्तुएं हेपेटाइटिस बी संक्रमित व्यक्ति के साथ साझा करने तथा उसे पुनः उपयोग करने से
• हेपेटाइटिस बी संक्रमित बॉडी फ्ल्यूड के संपर्क में आने से

हेपेटाइटिस बी के प्रकार – Types of Hepatitis b in Hindi

  • क्रोनिक हेपेटाइटिस बी
  • एक्यूट हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी के लक्षण – Hepatitis b symptoms in Hindi

• कुछ लोगों में एक्यूट या क्रोनिक हेपेटाइटिस बी वायरस होने के बाद भी कोई लक्षण नही दिखते हैं। अगर लक्षण दिखते हैं, तो वह निम्नलिखित तरह के होंगे –

• अत्यधिक थकान महसूस करना
• बुखार
• भूख न लगना
• मतली आना
• मांसपेशियों में दर्द
• लिवर कर पास पेट में दर्द होना
• जॉन्डिस

हेपेटाइटिस बी के लिए जांच – hepatitis b test in hindi

सामान्यतः हेपेटाइटिस बी का पता खून जांच से चल जाता है। हालांकि इलाज शुरू करने से पहले कुछ और निम्नलिखित जांच करवाने पर सकते हैं।

• हेपेटाइटिस बी वायरस की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजेन जांच

• एंटी कोर आईजीएम जांच ( एक्यूट हेपेटाइटिस बी की स्तिथि में एक खास एंटीबॉडी की मौजूदगी जांचने के लिए)

• हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीबॉडी टेस्ट ( यह जांचने के लिए की इम्यून सिस्टम ने हेपेटाइटिस बी वायरस के लिए एंटीबॉडी बनाया है या नही)

• हेपेटाइटिस बी वायरस किस तेज़ी से बढ़ रहा है, इसकी पुष्टि के लिए हेपेटाइटिस बी एनवेलप एंटीजेन टेस्ट

• हेपेटाइटिस बी एनवेलप एंटीबॉडी

• हेपेटाइटिस बी वायरस की मात्रा को समझने के लिए हेपेटाइटिस बी वायरस डीएनए

• लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी)
• लिवर का अल्ट्रासाउंड
• फाइब्रो स्कैन
• लिवर बॉयोप्सी

हेपेटाइटिस बी का इलाज – Hepatitis b treatment in hindi

हेपेटाइटिस बी का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि हेपेटाइटिस बी वायरस कितना सक्रिय है। तथा लिवर को नुकसान होने की स्तिथि है या नही। सामान्यतः एक्यूट हेपेटाइटिस बी वायरस (Acute hepatitis b virus) 6 महीने के अंदर ही अपने आप खत्म हो जाता है। इसे हेपेटाइटिस बी का घरेलु इलाज करके तथा जीवनशैली में बदलाव कर इसे ठीक किया जा सकता है।

अगर हेपेटाइटिस बी काफी लंबे समय से है यानी अगर यह क्रोनिक स्तिथि में पहुंच गया है तो स्तिथि पर लगातार नज़र बनाए रखनी होगी। तथा लिवर को कोई नुकसान न हो, इसके लिए एंटीवायरल दवाइयां दी जाती है। अगर हेपेटाइटिस बी के कारण लिवर को अत्यधिक नुकसान हो गया हो तो लिवर प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) की आवश्यकता पड़ेगी। इस पर अंतिम फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं।

हेपेटाइटिस बी में परहेज – Hepatitis b care in hindi

अगर आपको हेपेटाइटिस बी है तो आपको निम्नलिखित बातों का अनुसरण करना है –

• अपने दिनचर्या में बदलाव करें तथा उतना ही काम करें कि आपको थकान न हो।

• सुबह – सुबह कुछ खाएं तथा दिन में फिर कुछ हल्का खाना खाएं। ध्यान रखें कि ज़्यादा न खाएं।

• ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं

• नशीली दवाओं का सेवन तथा एल्कोहॉल का सेवन बंद कर दें।

• अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचें तथा अपने उपयोग के सामान को केवल अपने तक ही सीमित रखें। संबन्ध बनाते समय कॉन्डोम का उपयोग करें।

क्रोनिक हेपेटाइटिस बी का इलाज – Chronic Hepatitis b treatment in hindi

क्रोनिक हेपेटाइटिस बी (chronic hepatitis b) की स्तिथि में इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस कितना सक्रिय है। तथा लिवर को कितना खतरा है। इलाज का मुख्य उद्देश्य वायरस की वृद्धि को रोक कर लिवर के नुकसान को रोकना है। अगर वायरस सक्रिय है तथा लिवर को नुकसान का खतरा है तो आपको एंटीवायरल दवाओं का सेवन करना होगा। ये दवाई हेपेटाइटिस बी वायरस की वृद्धि को कम कर देता है।

हेपेटाइटिस बी को फैलने से रोकने के लिए क्या करें – how to stop spread of hepatitis B in hindi

हेपेटाइटिस बी वायरस के इन्फेक्शन से बचाव का सबसे सर्वश्रेष्ठ तरीका हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए 3 टीका लगाया जाता है। यह सभी बच्चों तथा हेपेटाइटिस बी के संभावित वयस्क मरीज को भी लगाया जाता है।

• हेपेटाइटिस बी से बचाव तथा इसे फैलने से रोकने के लिए निम्नलिखित बातों को कभी भी नज़र अनदेखा न करें –

• कमज़ोरी, बीमार महसूस करना, सेहत में लगातार गिरावट
• बिना डॉक्टर की सलाह के किसी तरह की दवाई न लें
• अपने निजी उपयोग की वस्तुएं अन्य के साथ साझा न करें।
• हमेशा डिस्पोजल निडिल का उपयोग करें।
• घाव होने और उसे ध्यान से साफ करें।
• परिवार में किसी एक के हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए जाने पर अन्य सदस्यों की भी जांच करवाएं तथा उन्हें भी हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।

हेपेटाइटिस बी से जुड़े कुछ मिथक तथा उसकी सच्चाई

मिथक – वायरल हेपेटाइटिस बी अधिक खतरनाक नही है, क्यों कि इसका टिका अधिक्तर लोगों को लगा हुआ रहता है।

सच्चाई – वायरल हेपेटाइटिस बी भी एक बड़ी बीमारी है। हेपेटाइटिस बी का टीका आने के बाद इसे लाखों लोगों को लगाया गया। फिर भी काफी लोग ऐसे भी थे जिन्हें टिका लगने से पहले ही यह वायरस लग चुका था। इसके अलावा यह ज़रूरी नही है कि प्रत्येक व्यक्ति को यह टिका लगाया ही गया हो।

मिथक – वायरल हेपेटाइटिस बी के चपेट में आने वाले व्यक्ति कभी भी ठीक नही हो पाते हैं।

सच्चाई – वायरल हेपेटाइटिस बी की चपेट में आने वाले 90 प्रतिशत वयस्क इस संक्रमण से ठीक हो जाते है। हालांकि अधिक्तर बच्चों में यह ठीक नही हो पाता है तथा वह क्रोनिक स्टेज में पहुंच जाता है। वहां से ठीक होना संभव नही है। हालांकि नई एंटीवायरल इलाज इसके अन्य समस्याओं को नियंत्रित करने में मददगार साबित होता है।

मिथक – वायरल वायरल हेपेटाइटिस बी तथा लिवर कैंसर में कोई संबन्ध नही है।

सच्चाई – यह सच है कि सभी हेपेटाइटिस बी के मरीज लिवर कैंसर के शिकार ही जाते हैं। लेकिन क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के 75 प्रतिशत मरीज लिवर कैंसर के शिकार हो जाते हैं।

मिथक – वायरल हेपेटाइटिस बी से नही बचा जा सकता है?

सच्चाई – यह बात सही नही है। हेपेटाइटिस बी का टीका इसके बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके 3 टीका लगवाने के बाद इससे काफी हद तक बचा जा सकता है।

याद रखें कि हेपेटाइटिस बी निम्नलिखित कारणों से नही फैलता है

• छींकने से
• खांसने से
• पानी पीने या खाने के बर्तन साझा करने से
• हांथ मिलाने से
• हांथ पकड़ने से
• गले लगाने से
• गाल पर चुंबन करने से
• बच्चों के साथ खेलने से

इस पोस्ट में हमने hepatitis b in hindi में जानकारी दी है। अगर आप हेपेटाइटिस बी के बारे के। हिंदी में और कुछ जानना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

नोट- इस लेख में बताई गई बातों को केवल जानकारी के तौर पर ही लें। इलाज संबंधित कोई भी फैसला डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

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