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Mortons Neuroma: मॉर्टन न्यूरोमा क्या है – जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

मॉर्टन्स न्यूरोमा क्या है – morton neuroma in hindi

मॉर्टन्स न्यूरोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें पैर का पंजा, विशेषकर पैर की उंगलियों के आसपास का हिस्सा बुरी तरीके से प्रभावित होता है। मॉर्टन न्यूरोमा बीमारी में पैर के अंगुलियों तक जाने वाले तंत्रिकाओं के ऊतक (टिशू) मोटे हो जाते हैं। इस कारण काफी अत्यधिक दर्द होता है। मॉर्टन्स न्यूरोमा को इन्टरमेटाटर्सल न्यूरोमा भी कहा जाता है।

चूंकि, इस स्तिथि में पैर की उंगलियों तक जाने वाले तंत्रिकाओं के ऊतक मोटे हो जाते हैं, इस कारण इस हिस्से में तंत्रिका के ऊतक ठोस होकर कंकड़ जैसा महसूस होने लगता है। इस लिए, इस स्तिथि में खड़े होने या चलने पर पैर के पंजे पर दबाव पड़ने के कारण पंजे में तेज़ी से कंकर चुभने जैसा एहसास होता है और व्यक्ति को काफी तेज दर्द होता है। दर्द के साथ जलन भी हो सकता है। इसके अलावा कभी – कभी पैर की उंगलियां सुन्न भी हो सकती है।

morton neuroma in hindi – मॉर्टन्स न्यूरोमा – मॉर्टन न्यूरोमा

मॉर्टन्स न्यूरोमा के लक्षण क्या हैं – Mortons neuroma symptoms in hindi

मॉर्टन्स न्यूरोमा में सामान्यतः पैर के पंजे पर बाहर से देखने पर कुछ भी अलग दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन मॉर्टन्स न्यूरोमा होने की स्तिथि में जैसे ही पैर के पंजे पर दबाव पड़ता है, तो काफी तेज दर्द, जलन, उंगलियों का सुन्न होना इत्यादि महसूस हो सकता है।

इसके अलावा खड़े होने या चलने पर पैर में कंकर चुभने जैसा लग सकता है। विशेषकर,जूते पहनने पर ऐसा लगेगा, मानो जूते में ही कंकर फंसा हुआ है। इसके अलावा पैर के पंजे में जलन के साथ दर्द होगा जोकि एड़ी तक भी महसूस हो सकता है। इसके अलावा प्रभावित पैर की उंगलियों में झुनझुनी लगने के साथ-साथ यह सुन्न भी हो सकता है।

● मॉर्टन्स न्यूरोमा के कारण क्या हैं – Morton Neuroma Cause in Hindi

मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का सामान्य कारण व्यक्ति के जीवन शैली पर काफी निर्भर करता है। आमतौर से इसका सबसे बड़ा कारण अत्याधिक कसे हुए जूते पहनने की आदत है। अत्याधिक कसे हुए जूते पहनने के कारण पैर की तंत्रिकाओं पर लगातार दबाव बनता है। इस कारण तंत्रिका के ऊतक मोटे होने लगते हैं। यह दर्द का कारण बनता हैं। समय के साथ यही मॉर्टन्स न्यूरोमा में बदल जाता है।

कई ऐसे खेल हैं, जिसमें खिलाड़ियों को लंबे समय तक के लिए काफी कसे हुए जूते पहनकर खेलना होता है। ये भी मॉर्टन्स न्यूरोमा का बड़ा कारण है। इसके अलावा लंबे समय तक सामान्य से अधिक ऊंची हील के जूते या सैंडल पहनने से भी मॉर्टन्स न्यूरोमा हो सकता है।

इसके अलावा इसका एक और बड़ा कारण पैर का असामान्य होना या चलने के असामान्य तरीकों (एब्नार्मल गेट पैटर्न) का होना भी है। पैरों के असामान्य होने या चलने के असामान्य तरीकों से भी पैर की तंत्रिका पर काफी दबाव बढ़ता है। यह भी मॉर्टन्स न्यूरोमा का कारण बनता है। इन सबके अलावा किसी दुर्घटना में पैर की उंगलियों तक जाने वाली तंत्रिकाओं के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी मॉर्टन्स न्यूरोमा हो सकता है।

● मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का खतरा किसे अधिक होता है – Morton’s neuroma risk factors

निम्नलिखित लोगों को मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का खतरा अधिक होता है –

ऊंची एड़ी वाले जूते पहनने वालों में – हमेशा ऊंची एरियों वाले जूते या सैंडल पहनने के आदी लोगों में मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का खतरा काफी अधिक होता है। कई अध्ययनों में इसे ही मॉर्टन्स न्यूरोमा का प्रमुख कारण भी बताया जाता है।

कुछ खेल– ऐसे खेल जिसमें लगातार पैर के पंजों पर काफी दबाव पड़ता हो या जिसमें लगाता काफी कसे हुए जूते पहने होते हों, जिससे कि पैर पर लगातार दबाव बना रहता हो तो उससे भी मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का खतरा बना रहता है। जैसे – जॉगिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, रनिंग, हाई जम्पिंग इत्यादि।

फूट डिफॉरमेटी- फूट डिफॉरमेटी यानी कि पैरों के टेढ़ा मेढ़ा या असामान्य होने की स्थिति में व्यक्ति ठीक ढंग से नहीं चल पाता है। ऐसी स्तिथि में दबाव असामान्य तरीके से पैर के पंजों पर काफी अधिक पड़ने लगता है। इस कारण, ऐसे व्यक्तियों को भी मॉर्टन्स न्यूरोमा होने का अधिक खतरा रहता है।

मॉर्टन्स न्यूरोमा का जांच क्या है – Mortons neuroma tests in hindi

सामान्यतः लक्षणों के आधार पर मॉर्टन्स न्यूरोमा की पहचान की जा सकती है। लेकिन, फिर भी डॉक्टर इस बीमारी को कंफर्म करने के लिए दर्द वाले हिस्से का परीक्षण करते हैं। इस दौरान, वहां हल्का दबाव देकर यह कंफर्म किया जा सकता है कि यह मॉर्टन्स न्यूरोमा की बीमारी है या नहीं।

फिर भी अगर इससे मॉर्टन्स न्यूरोमा की बीमारी साबित नहीं होती है तो और इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए डॉक्टर एक्सरे, एमआरआई या अल्ट्रासाउंड में से कुछ करने के लिए कह सकते हैं। इससे यह साफ हो जाएगा कि यह मॉर्टन्स न्यूरोमा है या नहीं। इसके आधार पर आगे इलाज किया जाएगा।

● मॉर्टन्स न्यूरोमा का इलाज क्या है – Mortons neuroma treatment in hindi

मॉर्टन्स न्यूरोमा का इलाज सामान्यता इसकी तीव्रता (सिवियरिटी) पर पर निर्भर करता है। इलाज की शुरुआत में पहले पारंपरिक (कंज़र्वेटिव) तरीकों से इलाज करने की कोशिश की जाती है। अगर इससे लाभ नहीं मिलता है तो फिर कुछ सर्जरी की जाती है।

● मॉर्टन्स न्यूरोमा का पारंपरिक इलाज – Morton Neuroma ka gharelu ilaj

मॉर्टन्स न्यूरोमा के पारंपरिक इलाज के रूप में मुख्य रूप से आराम करने की सलाह दी जाती है। अगर बीमारी का कारण ऊंची एड़ी वाले जूते या सैंडल का उपयोग है तो, सबसे पहले ऐसे जूते या सैंडल का उपयोग करने से मना कर दिया जाता है। इसके अलावा कंज़र्वेटिव इलाज के तरीकों में फिजियोथेरेपी भी काफी प्रभावी साबित होता है। फिजियोथेरेपी के तहत अलग-अलग व्यायाम से मॉर्टन्स न्यूरोमा में काफी आराम मिलता है।

इसके अलावा पैर पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए विशेष रूप से तैयार जूते पहनने के लिए दिए जा सकते हैं। इन जूतों में आर्क स्पोर्ट और फूट पैड्स लगाए जाते हैं। कंज़र्वेटिव इलाज के क्रम में ही डॉक्टर मरीज को नॉन स्टेरॉयडल एन्टी इन्फ्लामेट्री दवाएं और कुछ दर्द निवारक दवाएं (पेन किलर) भी दे सकते हैं।

अगर कंज़र्वेटिव इलाजों से कोई फायदा नही होता है तो डॉक्टर निम्नलिखित इलाज के तरीके अपना सकते हैं –

इंजेक्शन – दर्द वाले हिस्से में कुछ स्टेरॉइड्स के इंजेक्शन दिए जाते हैं। इससे दर्द से काफी आराम मिलता है।

डिकम्प्रेशन सर्जरी – चूंकि, मॉर्टन्स न्यूरोमा की बीमारी पैर की उंगलियों तक जाने वाली तंत्रिकाओं पर लगातार दबाव पड़ने के कारण होता है। इस लिए सर्जरी के माध्यम से उस हिस्से से कुछ लिगामेंट्स और कुछ हड्डियों को काट कर हटा दिया जाता है। इससे तंत्रिका पर दबाव कम होने से दर्द से आराम मिलती है।

न्यूरेक्टोमी – जब इलाज के सभी तरीके नाकाम हो जाते हैं तो अंतिम विकल्प के रूप में सर्जरी की जाती है। इस प्रक्रिया के तहत तंत्रिका के मोटे हुए ऊतक के हिस्से को काट कर हटा दिया जाता है। यह इलाज का काफी प्रभावी तरीका है और इसकी सफलता दर भी काफी अधिक है। हालांकि, इसका एक नुकसान यह है कि जिस पैर में यह सर्जरी की जाती है, उस पैर की कुछ उंगलियां हमेशा के लिए सुन्न हो जाता है।

क्रायोजेनिक सर्जरी – मॉर्टन्स न्यूरोमा के इलाज के रूप में एक अन्य सर्जरी की जाती है, इसे क्रायोजेनिक सर्जरी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में प्रभावित हिस्से में काफी ठंडे तापमान का उपयोग करते हुए इलाज किया जाता है।

इस लेख में हमने मॉर्टन्स न्यूरोमा के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है। अगर आप इस विषय में कुछ और पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

नोट – इसमें बताई गई जानकारी को केवल सलाह के तौर पर लें।

धन्यवाद

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