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physiotherapy treatment for spasticity : स्पाजम क्या है या स्पास्टिसिटी क्या है – स्पास्टिसिटी का फिजियोथेरेपी इलाज

अगर आप जानना चाहते हैं कि स्पास्टिसिटी क्या है (Spastisity kya hai) तो इस आर्टिकल को लास्ट तक पढ़ें। इसमें हम स्पास्टिसिटी हिंदी में (spasticity in hindi) या spasticity ka hindi meaning बताएंगे। तो spasticity hindi meaning जानने के लिए इस आर्टिकल को लास्ट तक पढ़ें साथ ही spasticity meaning in hindi से जुड़ी दूसरी महत्वपूर्ण बातें जानने के लिए भी इसे लास्ट तक पढ़ें। चलिए सबसे पहले बात करते हैं कि spasticity ka hindi meaning क्या होता है या spasticity in hindi क्या होता है।

स्पास्टिसिटी का हिंदी मतलब – spasticity hindi meaning

Spasticity Hindi Meaning या Spasticity Ka Hindi Meaning की बात करें तो हिंदी में स्पास्टिसिटी का अर्थ या स्पास्टिक अर्थ कई सन्दर्भ में होता है। लेकिन मेडिकल फील्ड में स्पास्टिसिटी की बात करें तो spasticity ka hindi meaning कड़ापन या जकड़न होता है। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो मांसपेशियों का अत्यधिक कड़ा हो जाना ही स्पास्टिसिटी कहलाता है।

मांसपेशियों के अत्यधिक कड़ें हो जाने की वजह से Joint Function तथा बाकी एक्टिविटी काफी प्रभावित हो जाता है। इससे मरीज़ को काफी दिक्कत होती है। जीव व्यक्ति में मसल स्पास्टिसिटी हो जाती है उसे Spastic Person भी कहा जाता है। यहां आपको अब स्पास्टिक मीनिंग इन हिंदी या spastic person hindi meaning भी समझ में आ गया होगा।

spasticity ka hindi meaning जानने के बाद चलिए अब बात करते हैं स्पास्टिसिटी के परिभाषा की।

स्पास्टिसिटी क्या है – What is Spasticity in Hindi

Spastisity Definition in Hindi – स्पास्टिसिटी एक मशल कंट्रोल डिसऑर्डर (Muscle Control Disorder) है। इस स्थिति में मांसपेशियां बहुत कड़े (Tight) या कठोर (Stiff) हो जाते हैं। मांस पेशियों के करे हो जाने की वजह से उन मांस पेशियों को नियंत्रित करने की क्षमता बेहद कम या खत्म हो जाती है।

मसल स्पास्टिसिटी का कारण – Spasticity Cause in Hindi

ऐसा आमतौर से ब्रेन इंजरी या स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद होता है। सेंट्रल नर्वस सिस्टम (central nervous system) की समस्या के कारण ब्रेन से आने वाला सिग्नल प्रभावित होने लगता है। इस स्थिति को Imbalance of signals कहा जाता है। इस स्थिति में स्पास्टिसिटी काफी अधिक देखी जाती है। सेरेब्रल पाल्सी, ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी, स्ट्रोक, स्क्लेरोसिस इत्यादि के मरीज़ो में स्पास्टिसिटी आमतौर से देखने को मिलता है।

स्पास्टिसिटी के लक्षण – Symptoms of Spasticity in Hindi

स्पास्टिसिटी के लक्षण या Spastisity symptoms in Hindi निम्नलिखित हैं -.

-मसल टोन बढा हुआ रहता है।

  • Overactive reflexes देखने को मिलता है।
  • जोड़ों में बिना मतलब के मूवमेंट यानी involuntary movements दिखते हैं।
  • मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
  • व्यक्ति अपना काम भी खुद नहीं कर पाता है।
  • Abnormal posture भी दिखता है।
  • समस्या गंभीर होने पर स्पाजम Contractures में बदल जाता है।
  • हड्डियों तथा जोड़ो की deformities हो जाती है।

स्पास्टिसिटी या स्पाजम का इलाज – Spastisity Treatment in Hindi

मसाले इस पागल होने की वजह से एक व्यक्ति का जीवन बुरी तरीके से प्रभावित होता है। इसलिए इसका इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाता है। स्पाजम के इलाज में कई तरह की दवाएं तथा इंजेक्शन दिया जाता है। जो कि मसल्स स्पाजम को घटाने के साथ-साथ मसल एक्टिविटी को बढ़ाता है।

लेकिन स्पास्टिसिटी के केस में जो सबसे बेहतर इलाज माना जाता है वह फिजियोथेरेपी है। दवाई के साथ-साथ फिजियोथेरेपी की भी भूमिका काफी अहम हो जाती है। इसलिए हम आपको आगे विस्तार से मसल स्पाजम के इलाज के बारे में बताते हैं।

● काठिन्य के लिए भौतिक चिकित्सा उपचार – physiotherapy treatment for spasticity

Spastisity in Hindi

स्पाजम के इलाज में या स्पास्टिसिटी के इलाज में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका काफी अहम ही जाती है। एक फिजियोथेरेपिस्ट स्पाजम के केस में इलाज के द्वारा मरीज़ के फंक्शन को बेहतर करता है। short tissue shortening की संभवना को कम करता है। साथ ही मांसपेशियों में होने वाले दर्द को भी कम करता है।

Physiotherapy for spasticity या काठिन्य के लिए भौतिक चिकित्सा यानी स्पाजम के लिए फिजियोथेरेपिस्ट निम्नलिखित चीजें कर सकते हैं –

  • मरीज़ की आत्मनिर्भरता को बढाने के लिए मरीज़ को अलग-अलग तरह के व्यायाम दिए जाते है।
  • मरीज़ की स्थिति को देखते हुए मरीज़ को खड़ा किया जाता है।
  • मरीज़ को एक जगह से दूसरी जगह या बिस्तर से Wheelchair तथा wheelchair से बिस्तर पर ट्रान्सफर होना सिखाया जाता है।
  • स्पाजम की स्थिति में Muscles stretching काफी कारगर साबित होता है।
  • स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों का कड़ापन कम होने के साथ-साथ दर्द से भी आराम मिलता है।
  • Spasticity Physiotherapy Treatment के तहत मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए Muscle Strengthening exercises भी दिया जाता है।
  • Upper तथा Lower Limb में लगातार weight bearing activities करवाई जाती है।
  • स्पास्टिसिटी कम करने के लिए तथा मरीज की आसानी के लिए मरीज की देखभाल कर रहे लोगों तथा मरीज के घर वालों को भी विभिन्न तकनीक बताई जाती है। मरीज़ को कैसे सुलाना है, कैसे बैठाना है तथा मरीज की कैसे देखभाल करनी है। इससे स्पाजम कम होती है।
  • स्पाजम कम करने के लिए एक्सरसाइज के साथ-साथ Physiotherapy splints और Physiotherapy casts का भी उपयोग होता है।
  • Spastic limb में splints और casts आमतौर से जॉइंट रेंज ऑफ मोमेंट्स (range of movement) बढाने के लिए दिया जाता है।
  • Hydrotherapy का भी उपयोग स्पाजम कम करने के लिए किया जाता है।
  • Electrotherapy भी Spasticity ka physiotherapy treatment में कारगर साबित होता है।

ये कुछ चुनिंदा एक्सरसाइसेज है जो Muscle Spasm Patient को दिया जाता है। इसके अलावा मरीज की स्थिति को देखते हुए कुछ एक्सरसाइज घटाएं या बढ़ाए जा सकते हैं। एक्सरसाइज कितनी देर देना है, यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

अब आपको पता चल गया है कि स्पाजम क्या है (Spasm kya hai) या spasticity ka hindi meaning क्या होता है। spasticity in Hindi में जानने के साथ – साथ आपको physiotherapy treatment for spasticity in Hindi भी मालूम चल गया है।

अगर आप इस विषय में या फिजियोथेरेपी के संबन्ध में कोई सवाल करना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

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