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पिछले कुछ सालों में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। पहली बार स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सुनने पर बहुत से लोगों को ज्यादा समझ में नहीं आ पाता है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या है (Spinal Cord Injury kya hai) या स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या होता है (Spinal Cord Injury kya hota hai). अगर आप भी हिंदी में जानना चाहते हैं कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या है (Spinal Cord Injury in Hindi) या स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या होता है तो इस आर्टिकल पर लास्ट तक पढ़ें।

इस आर्टिकल में हम हिंदी में बताएंगे कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या है (Spinal Cord Injury Hindi mein). स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का कारण क्या है (Spinal Cord Injury ka karan). स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लिए जांच क्या किया जाता है तथा स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का इलाज (spinal cord injury treatment in hindi) क्या होता है।

आगे बढ़ने से पहले तथा स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या होता है, यह जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह स्पाइनल कॉर्ड क्या है। अगर आप यह जान लेंगे कि स्पाइनल कॉर्ड क्या होता है तो स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हिंदी (Spinal Cord Injury Hindi me) में समझने में आसानी होगी। तो पहले स्पाइनल कॉर्ड जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। वहां से आपको स्पाइनल कॉर्ड के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से मिल जाएगी। 

उम्मीद है कि आप अब समझ चुके हैं कि स्पाइनल कॉर्ड क्या है या स्पाइनल कॉर्ड मीनिंग इन हिंदी (Spinal Cord Meaning in Hindi) क्या होता है। चलिए अब बात करते हैं कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या होता है या  स्पाइनल कॉर्ड प्रॉब्लम क्या है।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी या रीढ़ की हड्डी में चोट – Spinal Cord Injury in Hindi

Spinal cord injury Hindi mein —  स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की परिभाषा की बात करें तो स्पाइनल कॉर्ड के किसी भी हिस्से का क्षतिग्रस्त हो जाना ही स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (Spinal Cord Injury) कहलाता है। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी Spinal Cord के किसी भी हिस्से में देखने को मिल सकता है। आपने पिछले लेख में जान लिया होगा कि स्पाइनल कॉर्ड व्यक्ति के मस्तिष्क से लेकर कमर के नीचे वाले हिस्से तक होता है। तो इस पूरे हिस्से में कहीं पर भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो सकता है।

Spinal cord injury in hindi

स्पाइनल कॉर्ड प्रॉब्लम या स्पाइनल कॉर्ड इंजरी में होता यह है कि या तो स्पाइनल कॉर्ड किसी कारण बीच से कट कर दो भाग में अलग हो जाता है। या कई बार रीढ़ की हड्डी में चोट लगने की वजह से स्पाइनल कॉर्ड दब जाते हैं। या कई बार रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण रीड की हड्डी के इधर-उधर होने के कारण भी स्पाइनल कॉर्ड में भी अंदरूनी चोट लग जाता है। इससे भी व्यक्ति की स्थिति बिगड़ जाती है। यही स्पाइनल कॉर्ड इंजरी या स्पाइनल कॉर्ड प्रॉब्लम कहलाता है। spinal cord injury को ही शार्ट में SCI भी कहा जाता है।

आपको बता दें कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होने के बाद व्यक्ति की जिंदगी बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। व्यक्ति का जिंदगी किस हद तक प्रभावित होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी किस तरीके की हुई है। जहां से भी स्पाइनल कॉर्ड या स्पाइनल नर्व क्षतिग्रस्त होते हैं, उसके नीचे से पूरी तरीके से फंक्शन खत्म हो जाता है या इंजरी अगर आधी हुई है तो काफी हद तक फंक्शन अल्टर हो जाता है।  इस बारे में विस्तार से आपको हम आगे बताते हैं।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के प्रकार – Spinal Cord Injury Types in Hindi

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के प्रकार मुख्यता दो है। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लक्षण के आधार पर पता लगा सकते हैं कि कोई व्यक्ति किस प्रकार के स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से ग्रसित है स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के प्रकार  या  रीढ़ की हड्डी के चोट के प्रकार निम्नलिखित हैं –

Complete Spinal Cord Injury in Hindi – जब  स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरीके से दो अलग-अलग भागों में कट कर या टूट कर अलग हो जाता है तो इस स्थिति को कंप्लीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (Complete Spinal cord injury)  कहा जाता है।  इसे कंप्लीट ट्रांजैक्शन ऑफ स्पाइनल कॉर्ड (Complete Transection of Spinal cord) भी कहा जाता है।

इस स्थिति में जहां पर से स्पाइनल कॉर्ड टूट कर अलग हुआ है या कटा है उसके नीचे से व्यक्ति को कुछ भी महसूस होना बंद हो जाता है। व्यक्ति अपनी मर्जी से उस इंजरी लेवल के नीचे के अंगों को हिला भी नहीं पाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को स्पाइनल कॉर्ड इंजरी थोरेसिक पर हुआ है तो फिर इसके नीचे व्यक्ति कुछ भी अपनी मर्जी से कंट्रोल नहीं कर पाएगा। उदाहरण के तौर पर पैर की ताकत चली जाएगी, व्यक्ति को कुछ भी महसूस नहीं होगा साथ ही मल मूत्र पर भी कोई नियंत्रण नहीं रह जाता है। 

Incomplete Spinal Spinal Cord Injury in Hindi – इस स्थिति में स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरीके से कटकर अलग नहीं होता बल्कि या तो स्पाइनल कॉर्ड आधा कट जाता है। जबकि आधा हिस्सा एक साथ जुड़ा हुआ होता है। इसके अलावा संभव है कि स्पाइनल कॉर्ड पर चोट लगा हो सकता है या स्पाइनल कॉर्ड दब गया होगा। यह सब इनकंप्लीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (Incomplete Spinal cord injury) में आते हैं। इसमें व्यक्ति का फंक्शन पूरी तरीके से खत्म नहीं होता। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को इनकंप्लीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुआ है तो ऐसी स्थिति में या तो व्यक्ति को कम महसूस होगा साथ ही ताकत भी कम मिलने लगता है। इसके अलावा संभव है कि थोड़ा बहुत नियंत्रण मूत्र मल पर भी रहेगा। 

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी को टेट्राप्लेजिया और पैरा प्लेजिया नाम से भी कई बार दर्शाया जाता है। दरअसल यह दोनों एक स्थिति बनती है जब स्पाइनल कॉर्ड इंजरी किसी व्यक्ति को होता है।

टेट्रेपलेजिया का अर्थ होता है कि व्यक्ति का हाथ और पैर भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की वजह से प्रभावित हुआ है। क्वाड्रीप्लेजिया में दोनों हाथ और दोनों पैर प्रभावित होता है। जबकि पैरा प्लेजिया में आमतौर से दोनों पैर पैरालाइज हो जाता है। इसके अलावा पेल्विक ऑर्गन और ट्रंक का हिस्सा भी प्रभावित होता है।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लक्षण – Spinal Cord Injury Symptoms in Hindi

रीढ़ की हड्डी के चोट का लक्षण या Syptoms of Spinal Cord Injury in Hindi – स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का लक्ष्य (Spinal Cord injury ka laksha) इस बात पर निर्भर करता है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी किस लेवल पर हुआ है। यानी कि स्पाइनल कॉर्ड का कौन सा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। उसी आधार पर व्यक्ति में लक्षण देखने को मिल सकते हैं हालांकि हम आपको Spinal Cord injury के कुछ सामान्य रूप से देखे जाने वाले लक्षणों के बारे में बता रहे हैं –

जहां पर स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुई है उसके नीचे मोमेंट खत्म हो जाता है। यानी कि व्यक्ति अपने अंगों को अपनी मर्जी से हिला डुला नहीं सकता है। इंजरी के नीचे सेन्सेशम खत्म हो जाता है। यानी कि मरीज को छूने, पकड़ने, दबाने, जलने या ठंडा, दर्द इत्यादि का महसूस होना बंद हो जाता है।

 मल मूत्र पर कंट्रोल खत्म हो जाता है।

 धीरे धीरे मसल स्पाजम देखने को मिलने लगता है।

अगर किसी व्यक्ति को इंजरी गर्दन के नीचे या गर्दन के आसपास हुई है तो ऐसे व्यक्ति पर हाथ भी काम करना बंद कर देता है। हाथ में भी कुछ महसूस नहीं होगा। साथ ही मरीज को सांस लेने में दिक्कत होगी। वह खास नहीं पाएगा साथ ही बलगम इत्यादि फेंकने में भी असमर्थ रहेगा।

अगर स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है यानी इनकंप्लीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी है तो व्यक्ति में बहुत ज्यादा बैक पेन हो सकता है। गर्दन में भी दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा हाथों हथवा पैरों में बहुत ज्यादा तेज दर्द होने लग सकता है। दर्द कहां होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि Spinal Cord Damage कहाँ हुआ है। बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने लग सकती है। इनकोऑर्डिनेशन की समस्या हो सकती है। साथ ही कुछ हिस्से पैरालाइज्ड हो सकते हैं ।व्यक्ति को बैलेंस और चलने में काफी दिक्कत होगी।

यह कुछ स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लक्षण है जो आमतौर से देखे जाते हैं। हालांकि लक्षण इस आधार पर बदल सकता है कि किस जगह पर और किस तरीके का स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुआ है।

Cause of Spinal Cord Injury in Hindi – स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के कारण

Common causes of spinal cord injury या Cause of Spinal Cord Injury In Hindi – स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के कारण (Spinal Cord injury ke karan) की बात करें तो जब अचानक और काफी तेजी से स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ता है तो यही स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का कारण बनता है। अचानक की रीढ़ की हड्डी की चोट लगने या दबाव पड़ने की वजह से स्पाइनल कॉर्ड रीढ़ की हड्डी में आए बदलाव की वजह से दब या कट जाता है। 

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का जो सबसे सामान्य कारण है वह एक्सीडेंट है। आमतौर से वाहन के टकराने से यह गाड़ी चलाते समय एक्सीडेंट हो जाने के कारण स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होता है। पूरी दुनिया में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का सबसे सामान्य कारण गाड़ी चलाने के दौरान हुई दुर्घटना ही को ही माना जाता है। 

इसके अलावा भी कई कारण है। जैसे कि अगर कोई व्यक्ति कहीं ऊंची जगह से गिर जाए या किसी भी तरह गिर जाए तो उसके स्पाइनल कॉर्ड पर असर पड़ता है। रीढ़ की हड्डी की चोट की वजह से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो जाती है। गोली लगने की वजह से या चाकू द्वारा हमले की वजह से या किसी अन्य चीज द्वारा सीधे रीढ़ पर मारने की वजह से भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो जाती है। कुछ ऐसे खेल है जिसमें बहुत ज्यादा भाग दौर होती है तो उसमें भी दुर्घटनावश कभी अगर डायरेक्ट फोर्स स्पाइनल कॉर्ड पर लगता है तो इंजरी होने की संभावना रहती है।

पूरी दुनिया में जितने भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के मरीज या रीढ़ की हड्डी की चोट के मरीज़ हैं, उन पर किए गए रिसर्च से यह बात सामने आया था कि जितने भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की घटनाएं होती हैं, उनमें से चार में से एक मरीज नशे के कारण स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का शिकार होता है।

इन सबके अलावा कई ऐसी बीमारियां है जिसमें रीढ़ की हड्डी पर सीधा प्रभाव पड़ता है। रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी बीमारी होने पर भी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का खतरा बढ़ सकता है। कई बार रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर हो जाता है। इस कारण भी स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ने लगता है। या रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण लगातार स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ने से भी यह इंजरी हो सकती है।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लिए जांच – Spinal Cord Injury Test in Hindi

आमतौर से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी को कंफर्म करने के लिए सीटी स्कैन या एक्स-रे करवाया जाता है। इसके अलावा स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की गहराई को और बेहतर तरीके से समझने के लिए m.r.i. करवाया जाता है। MRI ही स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के मामले में सबसे सटीक जांच भी माना जाता है।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का इलाज – Spinal Cord Injury Treatment in Hindi

Spinal Cord ka upchar या spinal cord injury treatment in hindi –  दुर्भाग्य से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का इलाज (Spinal Cord Injury ka ilaj) अब तक नहीं खोजा जा सका है। पूरी दुनिया में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के इलाज के लिए रिसर्च जारी है। कुछ मामलों में थोड़ी बहुत कामयाबी जरूर मिली है। लेकिन अभी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के इलाज के लिए कोई ऐसी तकनीक मौजूद नहीं है जो कि आमतौर से उपयोग की जा सके। अभी इस पर रिसर्च ही जारी है। हालांकि कुछ तकनीक आए जरूर है लेकिन वह ज्यादा प्रभावी नहीं है। 

इसलिए जैसे ही कोई मरीज स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का शिकार हो जाता है, तत्काल इलाज तरह शुरू किया जाता है कि इंजरी के कारण होने वाली बाकी समस्याओं को कम किया जा सके। साथ ही तत्काल रुप से फिजियोथेरेपी शुरू कर दी जाती है। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का इलाज नहीं है, लेकिन फिजियोथेरेपी की एकमात्र विकल्प है। Spinal Cord Injury Physiotherapy से मरीज़ को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है। तथा मरीज के जीवन स्तर को बेहतर किया जा सकता है। 

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होने के बाद फिजियो थेरेपी – physiotherapy after spinal cord injury in Hindi

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद फिजियोथेरेपी एक उपाय है जिससे मरीज को की स्थिति को और बिगड़ने से बचाया जाता है। ध्यान रखें कि  फिजियोथैरेपी पहले दिन से लेकर तब तक करवाना होता है जब तक कि मरीज ठीक ना हो जाए। और जैसा कि आपने पढ़ लिया है दुर्भाग्य से अब तक फिजियो थेरेपी के अलावा स्पाइनल कॉर्ड के इलाज का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीज की नियमित रूप से फिजियोथेरेपी ही एक विकल्प है। 

एक बात ध्यान दें कि कंपलीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होने पर Physiotherapy मरीज की स्थिति को और बिगड़ने से बचाने तथा मरीज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। 

अगर मरीज़ incomplete spinal cord injury से ग्रसित है तो फिर इसका इलाज काफी हद तक संभव है। इसमें भी  शुरू से फिजियोथेरेपी की जाती है तथा मरीज को एक पूरे  spinal cord injury rehabilitation program से गुजारा जाता है। इनकंप्लीट होने की स्थिति में अगर स्पाइनल कॉर्ड पर बहुत ज्यादा प्रेशर पड़ रहा है तो स्पाइनल कॉर्ड इंजरी ऑपरेशन के द्वारा इसे ठीक करने की कोशिश की जाती है। साथ ही अगर इस Spinal Cord पूरी तरीके से कटकर अलग नहीं हुआ, तो धीरे-धीरे फिर स्पाइनल कॉर्ड अपने आप ठीक होने लगता है। इससे मरीज ठीक हो जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि इस स्थिति में भी लगातार मरीज़ के ठीक होने तक Physio Therapy करवानी पड़ती है। 

इस आर्टिकल में हमने आपको जानकारी देने की कोशिश की है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी क्या है (spinal cord injury meaning in hindi), स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के प्रकार क्या है, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के कारण क्या है, तथा स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लक्षण क्या होते हैं। साथ ही हमने स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के इलाज या रीढ़ की हड्डी के चोट के इलाज (Spinal Cord Injury Treatment in Hindi) के बारे में बताया है। अगर आप इस बारे में कुछ और जानना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। 

धन्यवाद

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